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मुम्बई। महाराष्ट्र में सर्वाधिक पैक्ड दूध और अपने आनेवाले अन्य ब्रांड बेचने वाले गोकुल ने अब गोकुल सेलेक्ट टेट्रा पैक मिल्क  बाज़ार में उतारा है. उच्च तापमान की प्रक्रिया से तैयार किये गये इस दूध की ख़ासियत यह है कि इसकी शेल्फ़ लाइफ़ तकरीबन 6 महीने होगी जिससे उपभोक्ता इसे हफ्ते महीनों तक आसानी से इस्तेमाल कर पाएंगे.

उल्लेखनीय है कि एक बार ख़रीदे जाने के बाद गोकुल सेलेक्ट को रूम के तापमान के मुताबिक आसानी से स्टोर किया जा सकेगा. स्वाद और क्वालिटी में बिना किसी के 6 महीने तक इसका सेवन किया जा सकेगा. बता दें कि महाराष्ट्र और गोवा में अपनी उपस्थिति रखने वाले गोकुल दूध का वार्षिक टर्नओवर ₹2,500 करोड का है.

कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड के अध्यक्ष रवींद्र आपटे कहते हैं, "मुम्बई में दूध ख़रीदारों का एक बहुत बड़ा बाज़ार मौजूद है, जहां पर अब ग्राहक लम्बी शेल्फ लाइफ़ वाले दूध ख़रीदने में रूचि दिखा रहे हैं क्योंकि उन्हें इस उत्पाद को महीनों स्टोर करने की सुविधा मिल रही है. कोविड-19 व लॉकडाउन के इस माहौल में सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करते हुए इस पैटर्न में काफ़ी बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी है.

बाज़ार में दूध के क्षेत्र में अन्य ब्रांडों की पहले से ही मौजूदगी से जुड़े सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मुम्बई के बाज़ार में दाखिल होने और अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का ये बेहतरीन मौका है क्योंकि उपभोक्ताओं को गोकुल ब्रांड की ओर से अच्छी क्वालिटी का दूध उपलब्ध कराये जाने के और भी विकल्प की उम्मीद है. अब उनके सामने एक ऐसा उत्पाद मौजूद है जिसे महीने में एक बार ख़रीद कर महीनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

  आपटे ने आगे कहा, "मुम्बई में टेट्रा पैक दूध का कुल बाज़ार 5 लाख लीटर है. ऐसे में गोकुल का लक्ष्य महज़ कुछ सालों में ही इस बाज़ार के 20% हिस्से पर काबिज़ होना है. मुम्बई में गोकुल टेट्रा पैक दूध को सफलतापूर्वक लॉन्च किये जाने के बाद जल्द इसे पुणे व दिल्ली जैसे शहरों में लॉन्च करने की योजना है. उल्लेखनीय है कि ताज़ा दूध की पूर्ति के लिहाज़ से मुश्क़िल राज्यों - हिमाचल प्रदेश, कुछ उत्तर-पूर्व राज्यों, गोवा व महाराष्ट्र के अन्य इलाकों में भी इसे जल्द लॉन्च किया जायेगा.

6 महीने की शेल्फ़ लाइफ़ के चलते गोकुल सेलेक्ट टेट्रा दूध का उपभोग लम्बे सफ़र के दौरान भी किया जा सकता है. इसके अलावा वे दूध की बिक्री के लिए ऑनलाइन व अन्य आधुनिक माध्यमों का भी इस्तेमाल करने में यकीन रखते हैं ताक़ि इसे बड़े पैमाने पर बेचने के अपने लक्ष्य को हासिल किया जा सके.

आप्टे बताते हैं, "अमेरिका व यूरोप के विकसित देशों में ताज़ा दूध की बिक्री बेहद कम है.

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