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मुंबई : यूके के निवेश मंत्री लॉर्ड गैरी ग्रिमस्टोन ने अपनी वर्चुअल भारत यात्रा के दौरान भारतीय उद्योग के दिग्गजों के साथ हुई राउंडटेबल बैठक में यूके इंडिया बिज़नेस काउन्सिल (आईबीसी) की 'डूईंग बिज़नेस इन इंडिया रिपोर्ट 2020' जारी की। यह रिपोर्ट वर्ष 2015 से यूके आईबीसी द्वारा शुरु की गई वार्षिक श्रृंखला का छठा संस्करण है। इस साल की रिपोर्ट मैन्यूफैक्चरिंग, सेवाएँ और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारत में परिचालन कर रही यूके के 106 संस्थाओं के साथ विस्तार से किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है। सर्वेक्षण में शामिल 66 प्रतिशत व्यवसायियों का कहना है कि भारत के सेवा प्रदाताओं, कुशल श्रमिकों, और आपूर्ति श्रृंखला की उपलब्धता और सहायता जैसे व्यापारिक वातावरण के घटकों में प्रगतिशील संशोधन और सुधार के कारण भारत में व्यापार करना आसान होता जा रहा है।

यूकेआईबीसी के ग्रुप सीईओ, जयंत कृष्णा ने कहा कि, “भारत में व्यापारिक माहौल की रेटिंग में प्रगतिशील ट्रेंड और 2015 से यूकेआईबीसी रिपोर्ट की शुरुआत के बाद से व्यापार के लिए बाधाओं का चरणबद्ध तरीके से हटाया जाना और हमारी 2020 की रिपोर्ट के निष्कर्ष बहुत सकारात्मक होने के साथ-साथ अत्यधिक प्रोत्साहित करने वाले हैं। ब्रैक्ज़िट, कोविड-19 और वैश्विक आर्थिक मंदी  जैसी नई चुनौतियों के बावजूद यूके स्थित कंपनियाँ भारत के प्रति गहरे रुप से वचनबद्ध हैं और कई कंपनियाँ भारत में अपनी व्यावसायिक उपस्थिति के विस्तार के बारे में आशान्वित हैं।

यूके भारत व्यापार परिषद की भारत में व्यापार करने पर तैयार की गई रिपोर्ट - डूईंग बिज़नेस इन इंडिया रिपोर्ट 2020, दर्शाती है कि यूके स्थित कारोबारियों को लगता है कि भारत में व्यापार वातावरण में सुधार हो रहा है और ब्रेक्ज़िट, कोविड-19 और वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद उन्हें ज़्यादा अच्छे यूके-भारत सहयोग के अवसर दिखाई देते हैं। यूके स्थित कंपनियाँ भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत मिशन’ को भारत में मैन्यूफैक्चरिंग के लिए यूके के नवाचार का लाभ उठाते हुए भारत में ज़्यादा व्यापार करने के अवसर के रुप में देखती हैं।

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