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मुंबई : वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने आसान धन देकर कमोडिटी मार्केट को बुरी तरह से प्रभावित किया है। प्रथमेश माल्या, एवीपी- रिसर्च नॉन-एग्री कमोडिटी एंड करेंसी, एंजल ब्रोकिंग लिमिटेड ने बताया कि जहां कोविड महामारी की वजह से जिंसों की मांग प्रभावित हो रही है, वहीं बैंक की ओर से अर्थव्यवस्थाओं में धन मुहैया कराने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग-आपूर्ति की अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो रही है।
सोना :मंगलवार को सोने की कीमतों में 2 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। मंगलवार को पीली धातु का बंद भाव 2018.1 प्रति औंस था। संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से अधिक स्टिमुलस की अपेक्षाओं के कारण सेफ-हैवन संपत्ति सोने की अपील को बाजार में बढ़ावा मिला। अमेरिकी डॉलर की स्थिति और अधिक स्टिमुलस की उम्मीदों के कारण सोना 2000 के स्तर के निशान से ऊपर रहा। महामारी का मुकाबला करने के लिए वैश्विक केंद्रीय बैंकों आसानी से धन मुहैया करा रहे हैं और इससे आ रही आर्थिक मंदी भी सोने की कीमतों के बढ़ने के पीछे एक बड़ा कारण है।
कच्चा तेल: अमेरिका के नए आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज को पेश करने की उम्मीदों के कारण तेल के लिए दृष्टिकोण को कम करके आंका गया था। डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतें मंगलवार को 1.84 प्रतिशत बढ़कर $41.0 प्रति बैरल पर बंद हुईं। कोरोनावायरस की दूसरी लहर के बावजूद दुनिया में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में कंपनियों के मैन्यूफेक्चरिंग पहलू में विस्तार से तेल की कीमतों को समर्थन मिला। इंस्टीट्यूट ऑफ सप्लाई मैनेजमेंट के अनुसार 2020 के जुलाई में पिछले 18 महीनों में सबसे अधिक गतिविधियां यूएस कारखानों में दर्ज हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि एशिया और यूरो-क्षेत्रों में मैन्यूफेक्चरिंग गतिविधियों के बढ़ने के कारण थी। हालांकि, ओपेक और उसके सहयोगियों ने ओवरसप्लाई के डर से इस महीने में अपने उत्पादन में 1.5 मिलियन बैरल की कटौती का फैसला किया है, जिससे कच्चे तेल के लाभ सीमित रहे। इस फैसले से बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम होने का अनुमान है।
बेस मेटल्स : मंगलवार को एलएमई बेस मेटल के पैक में सबसे ज्यादा फायदा एल्युमीनियम को मिला। ऑटो उद्योग में रिवाइवल और धातु के लिए चीन में बढ़ती मांग के कारण एल्यूमीनियम की कीमतों को समर्थन मिला। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल सेग्मेंट की ओर मांग बढ़ने के कारण एल्यूमीनियम के लिए आउटलुक कमजोर हुआ है। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों में एल्यूमीनियम की खपत बढ़ सकती है। औद्योगिक धातु की कीमतों को अमेरिकी, एशियाई और यूरोजोन देशों के मजबूत फैक्ट्री डेटा का सपोर्ट मिला है। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी के फेक्टर ने भी बाजार में औद्योगिक धातु की कीमतों का समर्थन किया।
कॉपर : एलएमई कॉपर की कीमतें मंगलवार को 1.20 प्रतिशत तक बढ़ गईं और 6490.0 डॉलर प्रति टन पर बंद हुईं। चीन द्वारा पोस्ट किए गए उत्साहित आर्थिक आंकड़ों के कारण लाल धातु के आउटलुक को कम आंका गया था। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े तांबा निर्माता पेरू में 2020 की पहली छमाही में तांबे के उत्पादन में 20.4 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। कोरोनावायरस के व्यापक प्रभाव के कारण औद्योगिक धातु की कीमतों पर दबाव का अनुमान है। चिली और पेरू में तांबे के उत्पादन में वृद्धि होने से लाल धातु की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

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