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मुंबई: दुनियाभर से कई अर्थव्यवस्थाओं ने लॉकडाउन नियमों को शिथिल करना शुरू कर दिया है और इसकी वजह से बुलियन और धातुओं की मांग बढ़ने की संभावना है। हालांकि, यूएस-चीन के बीच बढ़ता व्यापारिक तनाव निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित कर रहा है और इसका असर अर्थव्यवस्था की रिकवरी पर पड़ रहा है। सोने की कीमतें गुरुवार को 1.36 अंकों की गिरावट के साथ 1725.2 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुईं। बाजार में श्रम की अनुपलब्धता ने दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को भी हिला दिया है, और अमेरिकी बेरोजगारी दर लगातार सातवें सप्ताह बढ़ी है। एंजल ब्रोकिंग लिमिटेड के नॉन-एग्री कमोडिटीज एंड करेंसीज के चीफ एनालिस्ट प्रथमेश माल्या ने बताया कि अमेरिका की ओर से प्रकाशित कमजोर आंकड़ों की वजह से सोने की कीमतों को नुकसान पहुंच रहा है। कोविड-19 से लड़ने के लिए संभावित टीकों के ट्रायल्स और यूएस-चीन के बीच बढ़ती दरार ने निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित किया है।
स्पॉट सिल्वर की कीमतों में 2.5 प्रतिशत से अधिक का उछाल देखा गया और यह 17.1 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई। हालांकि, एमसीएक्स पर कीमत 3.51 प्रतिशत घटकर 47,335 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।
प्रमुख तेल उत्पादकों की ओर से आक्रामक मूल्य कटौती के बीच कई अर्थव्यवस्थाओं में वायरस संबंधी लॉकडाउन में शिथिलता से कच्चे तेल की मांग बढ़ी है जिसके परिणामस्वरूप डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.28 प्रतिशत बढ़कर 33.9 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण ओपेक और उसके सहयोगियों द्वारा उत्पादन में कटौती करना है। भले ही अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं में रिकवरी के साथ कच्चे तेल की मांग बढ़ने की उम्मीद थी, कच्चे तेल की कीमतों में लाभ सीमित रहा है। अमेरिका-चीन के बीच व्यापारिक युद्ध की अनिश्चितताओं के साथ-साथ महामारी के कारण आई आर्थिक गिरावट कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि को सीमित कर रही है। एमसीएक्स पर क्रूड ऑयल के कारोबार में उतार-चढ़ाव होने की उम्मीद है।

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