गणेश मूर्तियों के अपमान में हम भी है सहभागी
मि.प.संवाददाता/मुंबई
१० दिनों तक भगवान श्रीगणेश की मूर्ति की भक्तिभाव और श्रद्धा के साथ पूजा की जाती हैं। अंत में समुंदर में विसर्जन के बाद इन मुर्तियों के साथ किस तरह अपमान होता हैं शायद बहुत कम ही लोग जानते हैं। श्रद्धा और आस्था के नाम पर लोग जिस मुर्तियों की पूजा अर्चना करते हैं, उन्हीं मूर्तियों को मनपा कर्मी बुलडोजर के सहारे तोड़ मरोड कर कचरे की गाडियों में भर देते हैं। जिससे मूर्तियों का अपमान तो होता ही हैं साथ ही पीओपी से बनी इन मूर्तियों से समुंदर का वातावरण भी गंदा हो रहा हैं। यह कोई पहला किस्सा नहीं हैं, हर साल इसी तरह हम सभी अपने आराध्य का इसी तरह अपमान करते हैं।
इसी बात का विरोध करते हुए सामाजिक संस्था ’बै-वॉच लाइफगार्ड’ एवं गोरेगांव के आदर्श स्कूल के छात्रों ने मिलकर पर्यावरण को बचाने के लिए आगे आए। गणेश विसर्जन के दिन बाप्पा की के मूर्तियों का अपमान न हो इसलिए स्कूल के छात्रों ने जूहू चौपाटी पर छिन्न भिन्न अवस्था में पड़ी मूर्तियों को सम्मान के साथ किनारे कर सफाई अभियान में मनपा की सहायता की। कई सामाजिक एवं आम लोग भी सफाई अभियान में हाथ बटानो आगे आए। यहीं नहीं उन्होंने इस तरह देवी -देवताओं की पूर्जा अर्चना पर भी आपत्ती जताई।
पर्यावरण को बचाने के लिए लोगों को चाहिए कि वे धातुओं की मूर्तियों की पूजा करे और अपने भगवान को विसर्जित न कर हर साल उसी मूर्ति को अपने घरों में स्थापित करें। ठीक इसी प्रकार पिछले कई सालों से ’बै-वॉच लाइफगार्ड’ नामक संस्था हर साल लोगों को गणेश विसर्जन के दौरान यह समझाने की कोशिश करती हैं कि किस तरह मूर्तियों को विसर्जन करे, जिससे कि मूर्तियों पूरी तरह पानी में घुल जाए। साथ ही संस्था के कार्यकर्ता भी टूटी-फूटी मूर्तियों को ठिकाने लगाने में प्रशासन की मदद करते हैं।
गोरेगांव स्थित आदर्श विद्यालय के छात्रों से साथ पर्यावरण की सफाई के लिए आगे आई शिक्षिका सोनाक्षी पांचाल के मुताबिक पर्यावरण को बचाने के लिए लोगों को चाहिए कि वे धातुओं की मूर्तियों की पूजा करे और अपने भगवान को विसर्जित न कर हर साल उसी मूर्ति को अपने घरों में स्थापित करें। हालांकि पिछले कई सालों से ’बै-वॉच लाइफगार्ड’ नामक संस्था भी हर साल लोगों को गणेश विसर्जन के दौरान यह समझाने की कोशिश करती हैं कि किस तरह मूर्तियों को विसर्जन करे, जिससे कि मूर्तिया पूरी तरह पानी में घुल जाए। साथ ही संस्था के कार्यकर्ता भी टूटी-फूटी मूर्तियों को ठिकाने लगाने में प्रशासन की मदद करते हैं। संस्था के लाईफगार्ड कोऑर्डिनेटर बंटी राव ने मिशन पत्रकारिता को जानकारी देते हुए बताया कि सुबह से ही कार्यकर्ताओं ने सफाई करते हुए तकरीबन ४५० से भी ज्यादा मूर्तियों को निकाला। जबकि दोपहर १.३० बजे तक फूल-मालाओं के साथ कुल ६ ट्रक भर के कचरा यहां से निकालकर भेजा गया हैं।
विसर्जन के बाद पूरे दिन सुबह से ही कार्यकर्ताओं ने सफाई करते हुए तकरीबन ४५० से भी ज्यादा मूर्तियों को निकाला । फूल -मालाओं को साथ कुल ६ ट्रक भर के कचरा यहां से निकालकर भेजा गया हैं। विसर्जन के बाद समुंदर किनारे पर कई सारी जेली फिश मरी हुई दिखाई पड़ी। इस बार विसर्जन के दौरान जेली फिश ने कई भक्तों को घायल किया। संस्था के कार्यकर्ताओं ने इससे बचने के उपाय भी लोगों को बताए। इस अभियान के समय संस्था की ओर से मुख्य रूप से राजकुमार शाह, सुनिल शर्मा तथा मगन बालू रजपुत आदि लोगों में जागरुकता लाने का प्रयास कर रहे थे।


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