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अंधेरी पश्चिम स्थित शकुंतलम साभागार (तारापुर पेट्रोलपम्प के समीप) मे स्व. श्री भारत भूषण अग्रवाल द्वारा लिखित व युवा रंगकर्मी विशाल चतुर्वेदी द्वारा निर्देशित नाटक महाभारत की एक साँझ का मंचन किया गया । ये नाटक रामकृष्ण रेपर्टोयर सामाजिक एवं सांस्कृतिक समिती (भोपाल) नाट्य संस्था के अंतर्गत खेला गया । बड़े समय के बाद मुंबई मे एक बेहतरीन व खूबसूरत प्रस्तुति का आनंद दर्शकों द्वारा लिया गया । जहां एक ओर मुंबई मे अक्सर यथार्थवादी नाटकों का अधिक प्रचलन है वहीं इस नाटक ने दर्शकों पर अच्छा खासा प्रभाव छोड़ा, क्योंकि शास्त्रीय नाटक (क्लासिकल थिएटर) मुंबई मे बहुत कम या न के बराबर देखने को मिलते हैं । नाटक महाभारत की एक साँझ पांडव व कौरव पक्षों मे विभिन्न घटनाओं के मद्धेनजर वाद-विवाद पर आधारित हैं जिसमे ये दर्शाया गया की युद्ध का अंत केवल विनाश है किसी समस्या का समाधान नहीं, केवल मैत्री भाव ही है जो सृष्टि का उद्धार करता है ।
   नाटक मे मंच पर उपस्थित सभी अभिनेताओं ने अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया । नाटक मे शिवभक्त नृत्यांगना की भूमिका मे ज़ेनब गड़रिया थी जिन्होंने बड़ी ही सुंदरता से कत्थक नृत्य के माध्यम से शिव आराधना की, शिव व अश्वत्थामा की भूमिका मे प्रखर सक्सेना, दुर्योधन व धृतराष्ट्र की भूमिका मे राज अहिरवार, संजय की भूमिका मे अमन दीप वालिया, युधिष्ठिर की भूमिका मे मोहित मेहता और श्रीकृष्ण की भूमिका मे विशाल चतुर्वेदी थे । वहीं मंच पर रूपसज्जा मे बीना अहिरवार, प्रकाश परिकल्पना व संचालन तथा मंच सामाग्री निर्माण मे रचित सक्सेना, संगीत परिकल्पना व निर्माण मे आदर्श शर्मा (चिंटू), संगीत संचालन मे मृदुल शर्मा, वेषभूषा निर्माण मे राकेश नामदेव, वेषभूषा विन्यास मे प्रखर सक्सेना, मंच निर्माण मे राज अहिरवार तथा मंच व्यवस्थापक मे अमन दीप वालिया, बीना अहिरवार व रवीकान्त वासनिक थे । विशेष सहयोग शकुंतलम थिएटर (सभागार) व मध्यप्रदेश संस्कृति संचालनालय का रहा ।



     

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